Tag: Political Analysis

जब जनता राजनीतिक दलों से आगे निकलने लगे: लोकतंत्र के लि...

क्या भारत में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का स्वरूप बदल रहा है? यह गहन विश्लेषण बताता है कि युवाओं, जनआंदोलनों, संसद, सरकार और विपक्ष...

लोकतंत्र का नया 'आर्किटेक्चर': जन-प्रतिनिधित्व का विस्त...

लोकसभा सीटों के संभावित विस्तार और परिसीमन की बहस के बीच यह विश्लेषण लोकतंत्र, जन-प्रतिनिधित्व, संघवाद, विपक्ष की भूमिका और संसदीय...

बैंकीपुर उपचुनाव का संदेश: क्या भारतीय राजनीति अब जाति,...

बैंकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। क्या मतदाता अब ...

NEET से ध्यान भटकाने की राजनीति? 'मैंने माफ़ कर दिया' व...

NEET आंदोलन, जंतर-मंतर विवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'माफ़ी' वाले वीडियो के बाद उठे लोकतांत्रिक सवालों का गहन विश्लेषण। क्...

क्या सरकार का काम शासन चलाना है या लोगों की पार्टी पर न...

CJP के कथित पार्टी वीडियो पर उठे विवाद के बहाने यह लेख लोकतंत्र, निजता और राजनीतिक जवाबदेही के बीच संतुलन की पड़ताल करता है। क्या ...

सत्ता का अहंकार, खाकी की क्रूरता और एक स्त्री का हस्तक्...

जंतर मंतर, छात्र आंदोलन, लोकतंत्र, धर्मेंद्र प्रधान, सीमा धुंडिया, पुलिस सुधार, नागरिक पत्रकारिता, मानवाधिकार, राजनीतिक विश्लेषण, ...

मानसून सत्र 2026 का एजेंडा क्या है? जानिए परिसीमन (Deli...

मानसून सत्र 2026 में सरकार के प्रमुख विधेयक, परिसीमन (Delimitation) विवाद, महिला आरक्षण, आयकर सुधार, MSME, न्यायिक सुधार और विपक्ष...

सोनम वांगचुक का आमरण अनशन: क्या लोकतंत्र में भूख हड़ताल ...

सोनम वांगचुक के आमरण अनशन ने भारतीय लोकतंत्र, सरकार की जवाबदेही और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर नई बहस छेड़ दी है। पढ़ें गांधी, प...

सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत, सरकार की चुप्पी और उठते स...

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, मोदी सरकार की रणनीति, लोकतंत्र, संवाद, लद्दाख और राजनीतिक प्रभाव का 2026 के संदर्भ में विस्तृत, तथ्य-आ...

"क्या जनता सचमुच लोकतंत्र की मालिक है? जब सरकार अन्याय ...

क्या सरकार को अपनी गलतियों पर जनता से माफी मांगनी चाहिए? लोकतंत्र, जवाबदेही, नागरिक अधिकार और सरकार-जनता के रिश्ते पर एक गहन संपाद...

"चुनाव में 'मंगलसूत्र' बचाने की बात हुई थी, अब सोना चाह...

मंगलसूत्र' की राजनीति से गोल्ड मोनेटाइजेशन तक—क्या यह सिर्फ आर्थिक सुधार है या निजी संपत्ति अधिकारों पर नई बहस? पढ़िए तथ्य, तर्क औ...

पासपोर्ट, चुनाव आयोग और संविधान: आखिर न्यायमूर्ति मदन ब...

क्या पासपोर्ट सिर्फ यात्रा का दस्तावेज़ है? क्या चुनाव आयोग की शक्तियाँ संविधान से ऊपर हो सकती हैं? पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मद...

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