Tag: भारतीय राजनीति

“जनता मालिक है या सरकारी व्यवस्था?” दिव्या मित्तल के सव...

दिव्या मित्तल के राजनीति में प्रवेश और व्यवस्था पर उठाए सवालों के बहाने समझिए कि प्रशासन में जवाबदेही, जनता की भूमिका और राजनीति म...

पन्ना प्रमुख बनाम विचारधारा: क्या राजनीतिक दलों ने नीति...

पन्ना प्रमुख और बूथ मैनेजमेंट के बढ़ते प्रभाव के बीच क्या भारतीय राजनीति से विचारधारा, नीतियां और जनसरोकार पीछे छूट रहे हैं? चुनाव...

“दल-बदल नहीं, जनादेश से धोखा: राजनीति में विचारधारा की ...

दल-बदल सिर्फ कानून का मामला नहीं, बल्कि जनादेश, राजनीतिक विचारधारा और जनता के भरोसे का सवाल है। जानिए कैसे सत्ता के लिए पाला बदलने...

48 घंटे का अल्टीमेटम: ज्ञानेश कुमार पर क्यों भड़का चुना...

ECI विवाद में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की 48 घंटे की मांग, SIR से हटे करोड़ों नाम और आयोग के भीतर दर्ज 14 आपत्तियों पर जानिए पूरा ...

“जब प्रधानमंत्री ही जनता को बांटने लगें: ‘दिमागी नक्सल’...

प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ वाले बयान पर सवाल: क्या सत्ता को जनता की आलोचना से असहज होना चाहिए? लोकतंत्र में सव...

“रमाबाई ने दौड़ जीती, लेकिन सिस्टम हार गया! बेटी की कित...

बेटी की किताबों के लिए महाराष्ट्र की रमाबाई नंगे पैर दौड़ीं और जीत गईं। उनकी जीत से ज्यादा बड़ा सवाल उस व्यवस्था पर है, जो गरीबों ...

“मुसलमान नहीं होने चाहिए तो हिंदू नहीं”: भागवत के बयान ...

मोहन भागवत के “मुसलमानों के बिना भारत नहीं” वाले बयान ने नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि RSS के समावेशी संदेश और अनुषांगिक संगठनो...

“‘जियो और जीने दो’ बनाम ‘मारो और जियो’: क्या भारतीय राज...

भारतीय राजनीति में बदलती राजनीतिक संस्कृति, विपक्ष के प्रति रवैया, असहमति की आज़ादी, सत्ता के केंद्रीकरण और लोकतांत्रिक जवाबदेही प...

जनता ने डरना छोड़ा, सत्ता से सवाल शुरू! क्या डगमगा रहा ...

भारत में बढ़ते जनआक्रोश, बेरोजगारी, पेपर लीक, चुनावी पारदर्शिता, राजनीतिक फंडिंग और संस्थाओं की जवाबदेही पर उठते सवालों के बीच क्य...

जब अपने ही युवाओं को 'राष्ट्र-विरोधी' कहा गया: क्या मोह...

RSS प्रमुख मोहन भागवत के 'Gen Z आंदोलनकारी राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं' बयान के बाद उठते बड़े सवालों का विश्लेषण। क्या छात्र आंदोलनों ...

लोकतंत्र का नया 'आर्किटेक्चर': जन-प्रतिनिधित्व का विस्त...

लोकसभा सीटों के संभावित विस्तार और परिसीमन की बहस के बीच यह विश्लेषण लोकतंत्र, जन-प्रतिनिधित्व, संघवाद, विपक्ष की भूमिका और संसदीय...

बैंकीपुर उपचुनाव का संदेश: क्या भारतीय राजनीति अब जाति,...

बैंकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। क्या मतदाता अब ...

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