लाहौर गैंगरेप और क्रिप्टोकरेंसी मामला: इशाक डार के कथित पोते रज़ा डार पर अपहरण, यौन उत्पीड़न और फिरौती के गंभीर आरोप, पाकिस्तान में तेज हुई राजनीतिक बहस
लाहौर में दो विदेशी महिलाओं के कथित अपहरण, यौन उत्पीड़न, फिरौती और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में इशाक डार के कथित पोते रज़ा डार पर गंभीर आरोप, जानिए पूरा मामला।
By- Sudhir Taliyan Chaudhary Talan Khap
लाहौर: पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार एक ऐसे आपराधिक मामले को लेकर राजनीतिक विवादों में घिर गए हैं, जिसमें उनके कथित पोते रज़ा डार को मुख्य आरोपी बताया गया है। यह मामला दो विदेशी महिलाओं के कथित अपहरण, यौन उत्पीड़न, फिरौती की मांग और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी संपत्तियों पर कब्जा करने के प्रयास से संबंधित है।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों, पुलिस जांच, न्यायालय में दर्ज बयानों और समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रज़ा डार भी शामिल है। हालांकि, मामले की सुनवाई अभी जारी है और किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया है। इसलिए सभी आरोपों को कानूनी रूप से अभी केवल आरोप माना जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, दो विदेशी महिलाएं—एक नीदरलैंड और दूसरी वेनेजुएला की नागरिक—पिछले वर्ष सिंगापुर में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कारोबारी काम के दौरान रज़ा डार के संपर्क में आई थीं।
जांच अधिकारियों का दावा है कि बाद में रज़ा डार ने दोनों महिलाओं को पाकिस्तान आने के लिए बिजनेस वीजा की व्यवस्था कराने में मदद की। आरोप है कि पाकिस्तान पहुंचने के बाद उन्हें लाहौर स्थित एक घर में यह कहकर बुलाया गया कि वहां परिवार के एक सदस्य का जन्मदिन मनाया जा रहा है।
घर पहुंचने पर मिला सन्नाटा
पीड़ित महिला के बयान के अनुसार, जब दोनों महिलाएं बताए गए पते पर पहुंचीं तो घर पूरी तरह खाली था। लगभग 15 मिनट बाद चार हथियारबंद व्यक्ति वहां पहुंचे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों के पास हथियार और रस्सियां थीं।
महिलाओं का आरोप है कि उनके हाथ पीछे बांध दिए गए और उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद उन्हें कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया।
20 लाख डॉलर की कथित फिरौती की मांग
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों ने शुरुआत में लगभग 20 लाख अमेरिकी डॉलर की फिरौती मांगी।
पीड़ित महिला ने अपने बयान में आरोप लगाया कि यदि रकम नहीं दी गई तो उन्हें जान से मारने तथा उनके अंग बेच देने जैसी धमकियां भी दी गईं।
जांच अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान आरोपियों का मुख्य उद्देश्य केवल नकद रकम हासिल करना नहीं था, बल्कि महिलाओं के पास मौजूद डिजिटल संपत्तियों तक पहुंच बनाना भी था।
क्रिप्टोकरेंसी बनी कथित साजिश का केंद्र
मामले की सबसे चर्चित कड़ी क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज बयान में वेनेजुएला की महिला एस्ट्रिड गैब्रिएला रॉबिन्सन ब्राचो ने आरोप लगाया कि आरोपी लगातार उस कंप्यूटर तक पहुंच की मांग कर रहे थे जिसमें क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित डिजिटल वॉलेट और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी मौजूद थी।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि महिलाओं पर दबाव डालकर उनसे लगभग 19,000 अमेरिकी डॉलर की डिजिटल संपत्ति आरोपियों के वॉलेट में ट्रांसफर कराई गई।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इससे पहले या बाद में अन्य डिजिटल लेनदेन भी किए गए थे।
एक महिला की रिहाई के बदले 1 लाख डॉलर मिलने का आरोप
समाचार एजेंसी पीटीआई ने पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी रज़ा डार को एक महिला की रिहाई के बदले लगभग 1 लाख अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए।
हालांकि इस वित्तीय लेनदेन की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी जांच जारी है।
'कार्लितोस' बना जान बचाने का संकेत
इस मामले का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू पहले से तय किया गया एक गुप्त संकेत शब्द (कोड वर्ड) था।
डच महिला ने अपने बयान में बताया कि बंधक बनाए जाने के दौरान आरोपियों ने उसे अपने परिवार और दोस्तों को लगातार वॉयस मैसेज भेजने के लिए मजबूर किया ताकि पैसे भेजे जा सकें।
महिला ने दावा किया कि उसने इन संदेशों में चुपचाप पहले से तय किया गया कोड शब्द "CARLITOS" शामिल कर दिया।
परिवार इस संकेत का अर्थ पहले से जानता था। जैसे ही संदेश मिला, यूरोप में मौजूद परिजनों को समझ आ गया कि महिला गंभीर संकट में है।
इसके बाद परिवार ने अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क किया, जिससे पूरे मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंची।
यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप
पीड़िता ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज अपने बयान में आरोप लगाया कि 30 जून को एक हथियारबंद व्यक्ति ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया।
मामले की एफआईआर में भी अपहरण, यौन उत्पीड़न, फिरौती, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराएं शामिल की गई हैं।
पुलिस ने इन आरोपों की जांच शुरू कर दी है। मेडिकल, फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
कैसे भागकर बचीं दोनों महिलाएं?
महिला के बयान के अनुसार, 1 जुलाई को मुख्य आरोपी ने दोनों महिलाओं से कहा कि उन्हें एयरपोर्ट ले जाया जा रहा है।
जब वाहन सड़क पर आगे बढ़ रहा था तो महिलाओं को शक हुआ कि उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाया जा रहा है।
उन्होंने वाहन के अंदर ही शोर मचाना शुरू कर दिया।
इसी दौरान वाहन की हल्की टक्कर दूसरी कार से हो गई।
पीड़िताओं ने मौके का फायदा उठाया, चलती गाड़ी से बाहर निकल गईं और पास में मौजूद एक मैकेनिक की दुकान तक भागकर पहुंचीं।
दुकान में मौजूद लोगों ने उनकी मदद की।
बताया गया है कि वहां से गुजर रहे एक ट्रैफिक पुलिस अधिकारी की नजर दोनों महिलाओं पर पड़ी। उन्होंने तत्काल आपातकालीन सहायता बुलाकर महिलाओं को सुरक्षा प्रदान की।
पुलिस ने किन लोगों को गिरफ्तार किया?
पाकिस्तानी पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार किए गए लोगों में रज़ा डार भी शामिल है, जिसे पुलिस मुख्य आरोपी बता रही है।
एक अन्य आरोपी अभी भी फरार बताया जा रहा है और उसकी तलाश जारी है।
अदालत ने क्या फैसला दिया?
लाहौर की एक अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद गिरफ्तार आरोपियों को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया ताकि जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ कर सकें।
इस दौरान पुलिस डिजिटल उपकरणों, बैंकिंग रिकॉर्ड, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन और कथित फिरौती से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
इशाक डार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
यह मामला सामने आने के बाद पाकिस्तान की राजनीति में भी तीखी बहस शुरू हो गई है।
विपक्षी नेताओं ने सरकार से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।
सीनेटर फैसल वावडा ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि संघीय सरकार और पंजाब सरकार प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश कर रही हैं।
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हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों को लेकर आधिकारिक स्तर पर किसी भी तरह की पुष्टि नहीं की गई है।
इशाक डार ने भी सार्वजनिक रूप से मामले के तथ्यों पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।
क्या इशाक डार का इस्तीफा मांगा जा रहा है?
मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इशाक डार के इस्तीफे की मांग भी उठने लगी है।
विपक्षी दलों का कहना है कि इतने संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच के लिए सरकार को पूरी पारदर्शिता दिखानी चाहिए।
हालांकि अभी तक किसी सरकारी संस्था ने इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक कदम नहीं उठाया है।
डिजिटल अपराधों की नई चुनौती
यह मामला केवल अपहरण या कथित यौन अपराध तक सीमित नहीं है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या आरोपियों का उद्देश्य क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों को निशाना बनाना था।
दुनिया भर में हाल के वर्षों में डिजिटल संपत्तियों से जुड़े अपराध तेजी से बढ़े हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी अपराध में क्रिप्टो वॉलेट, डिजिटल पासवर्ड या निजी कुंजी (Private Keys) तक पहुंच बना ली जाए तो बड़ी मात्रा में डिजिटल संपत्ति पर कब्जा किया जा सकता है।
इसी कारण इस मामले में साइबर जांच भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
जांच अभी जारी
पुलिस ने कहा है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंकिंग रिकॉर्ड, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर और आरोपियों के बीच संपर्क की जांच जारी है।
यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो एफआईआर में अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
कानूनी स्थिति
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि—
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रज़ा डार सहित सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।
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उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं।
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अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर दिया जाएगा।
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जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और पीड़िताओं के बयान न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।
निष्कर्ष
लाहौर का यह मामला पाकिस्तान में कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, प्रभावशाली परिवारों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच और क्रिप्टोकरेंसी आधारित अपराधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
एक ओर पुलिस का दावा है कि विदेशी महिलाओं को सुनियोजित तरीके से पाकिस्तान बुलाकर कथित रूप से बंधक बनाया गया, उनसे फिरौती और डिजिटल संपत्ति हासिल करने का प्रयास किया गया तथा गंभीर यौन अपराध किए गए। दूसरी ओर, आरोपी अभी न्यायिक प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और अदालत में उनके खिलाफ आरोप सिद्ध होना बाकी है।
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आने वाले दिनों में पुलिस जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और अदालत की कार्यवाही इस हाई-प्रोफाइल मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेगी।
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