Tag: Rule of Law
क्या कानून-व्यवस्था के नाम पर बढ़ रही है मनमानी? संभल N...
संभल NSA मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज़ की हिरासत रद्द कर यूपी सरकार को बड़ा कानूनी झटका दिया। फैसले ने NSA के दुरुपयोग,...
FIR हुई तो क्या पुलिस को खुली छूट मिल गई? पत्रकार की तल...
पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ FIR और उनकी तलाश में दिल्ली पहुंची UP Police की कथित आधी रात की कार्रवाई ने पुलिस अधिकार, नागरिको...
“सत्ता का आदेश, IAS की कलम, पुलिस की FIR: इस असामाजिक ग...
भारत में IAS, पुलिस और सत्ता के बढ़ते गठजोड़ पर तीखा सवाल—क्या जनता की आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक शक्ति, FIR और मुकदमों का इस्तेम...
सवाल करने वालों पर UAPA-NSA, गंभीर आरोपों वालों पर नरमी...
सवाल करने वालों पर UAPA-NSA और गंभीर आरोपों में घिरे विदेशियों पर नरमी क्यों? NIA मामले ने कानून के समान इस्तेमाल, राष्ट्रीय सुरक्...
एक पोस्ट से इतनी घबराहट क्यों? विरोध की आवाज दबाकर सरका...
आशीष जोशी से नौ घंटे की पूछताछ ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। विरोध और आलोचना पर FIR या गिरफ...
सवाल पूछना गुनाह है क्या? BCI की कार्रवाई पर सुप्रीम को...
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कानून छात्रों की आवाज दबाने और असहमति को नियंत्रित करने की कोशिशों पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। जानिए ल...
SIT ने कहा ‘मुकदमा चलाइए’, सरकार ने कहा ‘नहीं’: विजय शा...
विजय शाह–कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद में SIT की अभियोजन मंजूरी की मांग ठुकराने के मध्य प्रदेश सरकार के फैसले ने सत्ता, संविधान, न्या...
पुलिस की वर्दी संविधान की है या सत्ता की?...
दिल्ली के जंतर-मंतर और किसान घाट की घटनाओं की पृष्ठभूमि में यह संपादकीय पुलिस, संविधान और लोकतंत्र के संबंधों पर सवाल उठाता है। ले...
सत्ता का अहंकार, खाकी की क्रूरता और एक स्त्री का हस्तक्...
जंतर मंतर, छात्र आंदोलन, लोकतंत्र, धर्मेंद्र प्रधान, सीमा धुंडिया, पुलिस सुधार, नागरिक पत्रकारिता, मानवाधिकार, राजनीतिक विश्लेषण, ...
बलूचिस्तान में मानवाधिकार संकट: गुमशुदगियां, दमन और दुन...
बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघन, जबरन गुमशुदगियां, छात्रों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी और संभावित समाधान पर ...