Tag: नागरिक अधिकार

कैमरा हिरासत में! जंतर-मंतर पर पत्रकारों के साथ ऐसा क्य...

जंतर-मंतर पर पत्रकारों की हिरासत, पुलिस कार्रवाई और इंटरनेट बंदी ने प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आखिर पत्रकारों...

“जनता मालिक है या सरकारी व्यवस्था?” दिव्या मित्तल के सव...

दिव्या मित्तल के राजनीति में प्रवेश और व्यवस्था पर उठाए सवालों के बहाने समझिए कि प्रशासन में जवाबदेही, जनता की भूमिका और राजनीति म...

क्या कानून-व्यवस्था के नाम पर बढ़ रही है मनमानी? संभल N...

संभल NSA मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज़ की हिरासत रद्द कर यूपी सरकार को बड़ा कानूनी झटका दिया। फैसले ने NSA के दुरुपयोग,...

“सवालों के सामने बैरिकेड, जवाबों की जगह सफाई: क्या सत्त...

बैरिकेड के पीछे से सत्ता संचालन, जनता के सवालों पर रोक और संस्थागत जवाबदेही का संकट। ज्ञानेश कुमार प्रकरण के संदर्भ में लोकतंत्र, ...

FIR हुई तो क्या पुलिस को खुली छूट मिल गई? पत्रकार की तल...

पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ FIR और उनकी तलाश में दिल्ली पहुंची UP Police की कथित आधी रात की कार्रवाई ने पुलिस अधिकार, नागरिको...

“सत्ता का आदेश, IAS की कलम, पुलिस की FIR: इस असामाजिक ग...

भारत में IAS, पुलिस और सत्ता के बढ़ते गठजोड़ पर तीखा सवाल—क्या जनता की आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक शक्ति, FIR और मुकदमों का इस्तेम...

“जनता पर लाठी, सत्ता के आगे सलामी? पुलिस जनता की है या ...

पुलिस जनता की है या सत्ता की? लाठीचार्ज, हिरासत, राजनीतिक दबाव और पुलिस जवाबदेही पर विजय के बयान के बहाने उठते गंभीर सवाल।...

“जब प्रधानमंत्री ही जनता को बांटने लगें: ‘दिमागी नक्सल’...

प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ वाले बयान पर सवाल: क्या सत्ता को जनता की आलोचना से असहज होना चाहिए? लोकतंत्र में सव...

“जब वर्दी संविधान भूल जाए: Justice Bhuyan की कड़ी चेताव...

Justice Ujjal Bhuyan की पुलिस कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी ने लोकतंत्र, नागरिक अधिकार, शांतिपूर्ण विरोध और पुलिस जवाबदेही पर गंभीर सवा...

एक पोस्ट से इतनी घबराहट क्यों? विरोध की आवाज दबाकर सरका...

आशीष जोशी से नौ घंटे की पूछताछ ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। विरोध और आलोचना पर FIR या गिरफ...

महाराष्ट्र का मराठी मॉडल पूरे देश में लागू हुआ तो भारत ...

महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के लिए मराठी की अनिवार्यता पर उठे सवालों की पड़ताल। अगर हर राज्य रोजगार के लिए अपनी भाषा ...

“‘जियो और जीने दो’ बनाम ‘मारो और जियो’: क्या भारतीय राज...

भारतीय राजनीति में बदलती राजनीतिक संस्कृति, विपक्ष के प्रति रवैया, असहमति की आज़ादी, सत्ता के केंद्रीकरण और लोकतांत्रिक जवाबदेही प...

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