ऑरेंज अलर्ट को भी किया नजरअंदाज! केदारनाथ में 216 हेलीकॉप्टर उड़ानें, हादसे में 6 की मौत; हेली कंपनियों की जवाबदेही पर सवाल
मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बावजूद 29 और 30 अक्टूबर को केदारनाथ धाम के लिए 216 हेलीकॉप्टर शटल उड़ानें संचालित हुईं। ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने से पायलट सहित छह लोगों की मौत हो गई। खराब मौसम में हेली सेवा संचालन, सुरक्षा मानकों की अनदेखी, एसओपी के अनुपालन और डीजीसीए व प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट
डॉ. बृजेश सती
चारधाम यात्रा में हेली सेवा संचालित करने वाली कंपनियों की मनमानी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी यात्रियों की जान पर भारी पड़ रही है। पिछले वर्ष हुई हेली दुर्घटनाओं के बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी कर एहतियाती कदम उठाने का दावा किया। मगर जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आ रही है। हेली सेवा प्रदाता कंपनियों पर इन निर्देशों का असर होता दिखाई नहीं दे रहा है। निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने और सिंगल इंजन हेलीकॉप्टरों का संचालन जारी रहने जैसी बातें, सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
चिंताजनक पहलू यह है कि पिछले दो दिनों के दौरान मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बावजूद केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के लिए हेलीकॉप्टरों की उड़ानें जारी रहीं। प्रतिकूल मौसम की चेतावनी के बीच इस तरह का संचालन यात्रियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही है। इससे डीजीसीए, शासन और स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था, कार्यशैली और जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विडंबना यह है कि मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद हेली सेवा कंपनियों की मनमानी जारी है। हेली सेवा प्रदाता कंपनियां यात्रियों की जान जोखिम में डालकर अपना व्यावसायिक हित साध रही हैं।
छह तीर्थ यात्रियों की मौत
शुक्रवार को ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें पायलट सहित छह यात्रियों की मौत हो गई। मृतक पांचों यात्री कर्नाटक राज्य के निवासी थे। दुर्घटना का कारण साफ नहीं हो पाया है। लेकिन प्रथम दृष्टया मौसम खराब होना इसका कारण बताया जा रहा है। बड़ा सवाल यह है कि मौसम विभाग की ओर से मौसम को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बाद भी हेलीकॉप्टर उड़ान की अनुमति कैसे और क्यों दी गई।
विगत बृहस्पतिवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो रही थी। ऐसे में हेलीकॉप्टर उड़ानों की अनुमति देना यात्रियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।
पिछले हफ्ते ट्रांस भारत एविएशन कंपनी के हेलीकॉप्टर को टिहरी जिले में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी थी।
ऑरेंज अलर्ट के बाद भी सैकड़ों शटल सेवा
दिलचस्प बात यह है कि मौसम विभाग की ओर से मौसम को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बाद भी 29 और 30 अक्टूबर को केदारनाथ के लिए उड़ान भरी गई। 29 और 30 तारीख को फाटा, सिरसी और गुप्तकाशी से दो दिनों में कुल 216 शटल सेवा की गई। इसमें 29 अक्टूबर को 155 और 30 अक्टूबर को 61 हेलीकॉप्टरों ने केदारनाथ के लिए उड़ान भरी। इसमें 29 को 915 और 30 अक्टूबर को 353 यात्री केदारनाथ धाम गए और वापस आए।
एसओपी का नहीं हो रहा अनुपालन
सरकार के स्तर से एसओपी बनाई गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसको लेकर सख्त निर्देश दिए गए। इसके तहत खराब मौसम, क्षमता से अधिक भार और उड़ान मार्गों पर कड़ी निगरानी रखने के लिए एसओपी लागू की गई है। लेकिन जमीन पर हवा में उड़ान भरने वालों पर एसओपी का ठीक से अनुपालन नहीं हो रहा है।
इधर बृहस्पतिवार को आपदा प्रबंधन सचिव की ओर से भी मौसम को देखते हुए दिशा-निर्देश जारी किए गए थे।
वर्ष 2025 में हुई थी 13 यात्रियों की मौत
पिछले साल 4 मई से लेकर 17 मई के बीच चार अलग-अलग कंपनियों के हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं। 8 मई को गंगनानी के पास एक हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ। इसमें 6 लोग कालकलवित हुए और एक गंभीर रूप से घायल हुआ। इसके बाद 10 मई को बदरीनाथ से फाटा जा रहे एक हेलीकॉप्टर को आपात स्थिति में ऊखीमठ में लैंडिंग करनी पड़ी।
12 मई को बदरीनाथ धाम में हेलीपैड पर उड़ान भरते समय एक हेली, पास खड़े वाहन से टकरा गया और बड़ी दुर्घटना होते-होते बची।
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16 मई को ऋषिकेश एम्स का हेली एंबुलेंस केदारनाथ हेलीपैड के समीप ही दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। ऐसे ही एक हेलीकॉप्टर को रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग पर आपात लैंडिंग करनी पड़ी थी।
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