किसान अब केवल धरना नहीं देगा, अपनी संसद लगाएगा! 17 बड़े विधेयकों के साथ 29 नवंबर को फरीदाबाद में जुटेंगे देशभर के किसान संगठन
किसान संसद 2026 का शीतकालीन सत्र 29 नवंबर को फरीदाबाद, हरियाणा में आयोजित होगा। किसान कर्जमाफी, महंगाई के सापेक्ष MSP की कानूनी गारंटी, गन्ना किसानों की 70:30 औद्योगिक हिस्सेदारी, ग्रामीण बिजली, भूमि अधिग्रहण, किसान आयोग, बीज अधिकार, स्वास्थ्य सुरक्षा और किसानों की आय संरक्षण सहित 17 प्रमुख विधेयकों पर राष्ट्रीय विमर्श होगा। संयुक्त किसान क्रांति मोर्चा एवं Consortium of Indian Farmer Associations की ओर से देशभर के किसान संगठनों और किसान नेताओं को आमंत्रण।
किसान संसद 2026: अब किसान केवल अपनी समस्याएं नहीं गिनाएगा, बल्कि देश की कृषि नीति और अपने अधिकारों का विधायी प्रारूप भी तय करेगा!
By- Chaudhary Sudhir Talyan
देश के प्रत्येक किसान संगठन, किसान नेता, किसान प्रतिनिधि और कृषि विशेषज्ञ से राष्ट्रीय किसान संसद में भागीदारी का आह्वान
आयोजन: किसान संसद – सत्र 2026
दिनांक: 29 नवंबर 2026
स्थान: फरीदाबाद, हरियाणा
भारत की अर्थव्यवस्था में किसान की भूमिका केवल अन्न उत्पादन तक सीमित नहीं है। किसान देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि उद्योग, प्राकृतिक संसाधनों और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। इसके बावजूद भारतीय कृषि व्यवस्था में किसान की आर्थिक स्थिति, सामाजिक सुरक्षा और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसकी भागीदारी आज भी गंभीर सवालों के घेरे में है। खेती की बढ़ती लागत, बाजार की अनिश्चितता, कर्ज का बोझ, अपर्याप्त कृषि मूल्य, महंगे कृषि उपकरण, बीजों की गुणवत्ता, प्राकृतिक आपदाएं और सरकारी नीतियों की अस्थिरता ने कृषि को लगातार जोखिमपूर्ण व्यवसाय बनाया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस किसान के उत्पादन पर देश की खाद्य व्यवस्था निर्भर करती है, उसी किसान की आमदनी और भविष्य बाजार की अनिश्चितताओं तथा नीतिगत निर्णयों के भरोसे क्यों छोड़ दिया गया है?
किसान कब तक अपनी समस्याओं को लेकर अलग-अलग संघर्ष करता रहेगा? कब तक किसान संगठनों की ऊर्जा केवल विरोध प्रदर्शनों, ज्ञापनों, धरनों और आश्वासनों के पीछे खर्च होती रहेगी? कब तक सरकारें किसानों की समस्याओं पर अस्थायी घोषणाएं करके वास्तविक संरचनात्मक सुधारों से बचती रहेंगी?
अब समय आ गया है कि किसान आंदोलन को केवल मांगों तक सीमित रखने के बजाय एक व्यापक नीतिगत और विधायी विमर्श में परिवर्तित किया जाए।
इसी उद्देश्य से 29 नवंबर 2026 को फरीदाबाद, हरियाणा में किसान संसद के शीतकालीन सत्र का आयोजन किया जा रहा है।
किसान संसद की आवश्यकता क्यों?
लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद कानून बनाती है, सरकार नीतियां लागू करती है और नागरिकों को उन नीतियों पर सवाल उठाने का अधिकार प्राप्त है। लेकिन कृषि नीति से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों में किसानों की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करना आज भी एक बड़ी चुनौती है।
किसान संसद इसी कमी को दूर करने का प्रयास है।
यह किसी एक संगठन, व्यक्ति, राजनीतिक दल या विचारधारा का मंच नहीं होगा। इसका उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों के किसान संगठनों, किसान नेताओं, कृषि विशेषज्ञों, ग्रामीण प्रतिनिधियों और प्रभावित समुदायों को एक साझा मंच पर लाकर कृषि से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों पर खुली बहस करना है।
यहां केवल समस्याओं का उल्लेख नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक समस्या के समाधान के लिए विधेयक का प्रारूप, आवश्यक कानूनी प्रावधान, वित्तीय व्यवस्था और क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर भी विचार किया जाएगा।
किसान को अपनी समस्या बताने के साथ-साथ उसका नीतिगत समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिलना चाहिए।
किसान संसद के प्रमुख प्रस्तावित विधेयक
किसान संसद के शीतकालीन सत्र में निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत चर्चा, विचार-विमर्श, संशोधन और संकल्प पारित करने का प्रस्ताव है।
1. किसान कर्ज पूर्णतः समाप्ति विधेयक
कृषि घाटे और लगातार बढ़ती उत्पादन लागत के कारण कर्ज के दुष्चक्र में फंसे किसानों के लिए व्यापक ऋणमुक्ति नीति बनाई जाए। संस्थागत एवं गैर-संस्थागत कृषि ऋण से मुक्ति के उपायों पर विचार हो।
2. महंगाई के सापेक्ष MSP की कानूनी गारंटी विधेयक
स्वामीनाथन आयोग के C2+50% सिद्धांत के अनुरूप न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया जाए। MSP को कृषि निवेश की लागत और महंगाई से जोड़ा जाए। MSP से कम कीमत पर खरीद के विरुद्ध प्रभावी कानूनी सुरक्षा तथा मूल्य अंतर भुगतान की व्यवस्था हो।
3. गन्ना किसान औद्योगिक लाभांश हिस्सेदारी विधेयक
गन्ना किसानों को चीनी मिलों एवं गन्ना आधारित उद्योगों की ग्रॉस इनकम में 70 प्रतिशत तथा उद्योग संचालकों को 30 प्रतिशत हिस्सेदारी देने के प्रस्ताव पर चर्चा हो। चीनी, एथेनॉल, बिजली, शीरा और अन्य उत्पादों से होने वाली आय को पारदर्शी लेखांकन में शामिल किया जाए।
4. ग्रामीण घरेलू बिजली निःशुल्क अधिकार विधेयक
ग्रामीण परिवारों के लिए घरेलू बिजली को आवश्यक बुनियादी सुविधा मानते हुए निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।
5. भारत-अमेरिका व्यापार समझौता एवं कृषि संरक्षण विधेयक
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित सभी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में भारतीय किसानों, कृषि उत्पादों और डेयरी क्षेत्र के हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। आयात नीति के कारण घरेलू कृषि बाजार को होने वाले नुकसान से बचाने के उपाय किए जाएं।
6. भूमि अधिग्रहण एवं किसान भागीदारी विधेयक
किसान को केवल मुआवजा प्राप्त करने वाला भूमि मालिक नहीं, बल्कि परियोजना का Stakeholder बनाया जाए। परियोजनाओं से उत्पन्न आर्थिक लाभ में उसकी दीर्घकालिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के कानूनी विकल्प तैयार किए जाएं।
7. राष्ट्रीय किसान आयोग गठन विधेयक
एक स्वतंत्र वैधानिक किसान आयोग का गठन किया जाए, जिसमें किसानों के निर्वाचित एवं प्रतिनिधि सदस्यों की भागीदारी हो। आयोग को कृषि नीतियों की समीक्षा, शिकायतों की सुनवाई और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए प्रभावी अधिकार दिए जाएं।
8. छोटी जोत के किसानों के लिए आय संरक्षण विधेयक
लघु एवं सीमांत किसानों के लिए न्यूनतम सुनिश्चित आय की व्यवस्था हो। खेती में होने वाले घाटे और बढ़ती लागत के अनुपात में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
9. किसान वृद्धावस्था पेंशन विधेयक
किसानों एवं पात्र ग्रामीण वृद्ध नागरिकों के लिए न्यूनतम ₹5,000 मासिक पेंशन सुनिश्चित की जाए तथा महंगाई के अनुसार इसमें समय-समय पर वृद्धि हो।
10. ग्रामीण रोजगार एवं कृषि एकीकरण विधेयक
VB-G RAM G (विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) को कृषि की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ा जाए। जल संरक्षण, सिंचाई, खेतों के आधारभूत ढांचे और ग्रामीण कृषि संसाधनों के विकास को प्राथमिकता दी जाए।
11. राष्ट्रीय बीज संप्रभुता एवं किसान बीज अधिकार विधेयक
बीज क्षेत्र में निजी कंपनियों के एकाधिकार पर नियंत्रण हो। सरकार प्रमाणित, शुद्ध, रोगमुक्त और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करे। खराब बीज से फसल नष्ट होने पर किसानों को क्षतिपूर्ति मिले।
12. कृषि फसल बीमा सुधार विधेयक
फसल बीमा में खसरा संख्या को मूल बीमा इकाई बनाया जाए। वास्तविक खेत में हुए नुकसान का आकलन करके मुआवजा दिया जाए।
13. कृषि उपकरण मूल्य निर्धारण विधेयक
कृषि उपकरणों की वास्तविक उत्पादन लागत और उचित व्यापारिक मार्जिन के आधार पर MRP निर्धारित करने की व्यवस्था हो। किसानों को मूल्य निर्धारण की पारदर्शी जानकारी मिले।
14. कीटनाशक एवं कृषि रसायन समीक्षा विधेयक
कीटनाशकों की उपयोगिता, प्रभावशीलता, गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की वैज्ञानिक समीक्षा हो। हानिकारक रसायनों पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए।
15. सार्वभौमिक परिवार स्वास्थ्य सुरक्षा विधेयक
प्रत्येक परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा सुनिश्चित हो। गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक सीमा के कारण उपचार बाधित न हो। गंभीर बीमारियों के लिए खर्च की ऊपरी सीमा समाप्त करने की व्यवहार्य वित्तीय एवं कानूनी व्यवस्था बनाई जाए।
16. किसान पशुपालन आय संरक्षण विधेयक
पशुपालन करने वाले किसानों को आय संरक्षण, पशु चिकित्सा, चारा, बीमा और दुग्ध उत्पादों के उचित मूल्य की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
17. वन्यजीव फसल क्षति एवं किसान जीवन सुरक्षा विधेयक
वन्यजीवों द्वारा नष्ट की गई फसल का वास्तविक मूल्य किसान को क्षतिपूर्ति के रूप में मिले। वन्यजीवों के हमले में किसान की मृत्यु होने पर परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजा देने की कानूनी व्यवस्था हो।
किसान संगठनों से विशेष अपील
देश में सैकड़ों किसान संगठन और हजारों किसान नेता कृषि अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके संघर्ष, अनुभव और जमीनी समझ को एक साझा नीतिगत दिशा देने की आवश्यकता है।
हम सभी किसान संगठनों, संयुक्त किसान मोर्चों, स्वतंत्र किसान नेताओं, क्षेत्रीय किसान समितियों, कृषि विशेषज्ञों, सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण प्रतिनिधियों से अपील करते हैं कि वे इस किसान संसद को किसी एक संगठन का कार्यक्रम न समझें।
यह साझा भागीदारी का मंच है।
आपके संगठन की अपनी विचारधारा, अपनी रणनीति और अपने आंदोलन की स्वतंत्रता बनी रहेगी। किसान संसद का उद्देश्य किसी संगठन का नेतृत्व स्वीकार करवाना या किसी संगठन को दूसरे से बड़ा साबित करना नहीं है। उद्देश्य है कि किसानों के साझा आर्थिक एवं सामाजिक हितों पर राष्ट्रीय सहमति विकसित हो।
हम चाहते हैं कि प्रत्येक किसान संगठन अपने प्रतिनिधि भेजे, अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करे, विधेयकों में संशोधन सुझाए और मतदान के माध्यम से निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बने।
किसानों के अधिकारों का प्रश्न किसी एक राज्य, जाति, संगठन या राजनीतिक दल का प्रश्न नहीं है। यह देश की कृषि व्यवस्था और ग्रामीण समाज के भविष्य का प्रश्न है।
अब केवल विरोध नहीं, वैकल्पिक व्यवस्था का प्रस्ताव भी जरूरी है
किसानों के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उनकी समस्याओं का समाधान घोषणाओं से नहीं, बल्कि स्थायी कानूनी और संस्थागत व्यवस्थाओं से हो।
कर्जमाफी के साथ भविष्य में कर्ज की आवश्यकता पैदा करने वाली परिस्थितियों को बदलना होगा। MSP के साथ खरीद व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। बीज की गुणवत्ता के साथ किसान के बीज अधिकारों की रक्षा करनी होगी। भूमि अधिग्रहण में मुआवजे के साथ परियोजनाओं में हिस्सेदारी पर विचार करना होगा। कृषि उत्पादन के साथ कृषि आधारित उद्योगों के लाभ में किसान की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
किसान को देश की अर्थव्यवस्था में केवल लागत और उत्पादन का आंकड़ा मानना बंद करना होगा।
हमारा स्पष्ट आग्रह है कि किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य, उसकी जमीन पर अधिकार, उसके उत्पादन पर नियंत्रण, उसके जीवन की सुरक्षा और देश की आर्थिक नीतियों में सम्मानजनक भागीदारी मिले।
राष्ट्रीय आमंत्रण
आइए, किसान संसद के शीतकालीन सत्र में सहभागी बनें।
देश के प्रत्येक किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, किसान नेता, कृषि विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और जागरूक किसान इस राष्ट्रीय विमर्श में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
अपने सुझाव, प्रस्ताव और विधेयकों के प्रारूप लेकर आएं। बहस करें, असहमत हों, संशोधन प्रस्तुत करें और किसानों के भविष्य के लिए साझा नीतिगत संकल्प तैयार करें।
दिनांक: 29 नवंबर 2026
स्थान: फरीदाबाद, हरियाणा
आयोजन: किसान संसद – सत्र 2026
आयोजक
संयुक्त किसान क्रांति मोर्चा
Consortium of Indian Farmer Associations (CIFA)
संपर्क एवं सहभागिता
किसान संसद में भागीदारी, प्रतिनिधि पंजीकरण एवं अन्य जानकारी के लिए संपर्क करें:
- 9058445505
- 9911638166
- 9818273229
- 9849512600
- 9909912231
- 8534065433
- 9448018290
यह किसी व्यक्ति विशेष का मंच नहीं, किसानों के अधिकारों पर राष्ट्रीय विमर्श का प्रस्ताव है।
किसान अब केवल अपनी पीड़ा सुनाने नहीं, अपने अधिकारों का विधायी प्रारूप तैयार करने के लिए एकत्रित होंगे।
किसान की आवाज को मांग से अधिकार और आंदोलन को नीतिगत परिवर्तन की दिशा देने के लिए किसान संसद में आपका स्वागत है।
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