Tag: लोकतंत्र

“12 साल, वही भाषण और वही बहाने: क्या मोदी सरकार ‘पॉलिसी...

मोदी सरकार के 12 साल में किसान कर्ज, बेरोजगारी, शिक्षा, महंगाई, बढ़ते सरकारी कर्ज और जवाबदेही पर तीखे सवाल। क्या देश policy paraly...

कैमरा हिरासत में! जंतर-मंतर पर पत्रकारों के साथ ऐसा क्य...

जंतर-मंतर पर पत्रकारों की हिरासत, पुलिस कार्रवाई और इंटरनेट बंदी ने प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आखिर पत्रकारों...

“ज्ञानेश कुमार के शोर में कौन से सवाल दब गए? क्या जनता ...

ECI विवाद के बीच बड़ा सवाल—क्या ज्ञानेश कुमार के मुद्दे के शोर में शिक्षा, महंगाई, आर्थिक संकट, किसान और खाद्य सुरक्षा जैसे असली ज...

“जनता मालिक है या सरकारी व्यवस्था?” दिव्या मित्तल के सव...

दिव्या मित्तल के राजनीति में प्रवेश और व्यवस्था पर उठाए सवालों के बहाने समझिए कि प्रशासन में जवाबदेही, जनता की भूमिका और राजनीति म...

क्या कानून-व्यवस्था के नाम पर बढ़ रही है मनमानी? संभल N...

संभल NSA मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज़ की हिरासत रद्द कर यूपी सरकार को बड़ा कानूनी झटका दिया। फैसले ने NSA के दुरुपयोग,...

पन्ना प्रमुख बनाम विचारधारा: क्या राजनीतिक दलों ने नीति...

पन्ना प्रमुख और बूथ मैनेजमेंट के बढ़ते प्रभाव के बीच क्या भारतीय राजनीति से विचारधारा, नीतियां और जनसरोकार पीछे छूट रहे हैं? चुनाव...

“सवालों के सामने बैरिकेड, जवाबों की जगह सफाई: क्या सत्त...

बैरिकेड के पीछे से सत्ता संचालन, जनता के सवालों पर रोक और संस्थागत जवाबदेही का संकट। ज्ञानेश कुमार प्रकरण के संदर्भ में लोकतंत्र, ...

“दल-बदल नहीं, जनादेश से धोखा: राजनीति में विचारधारा की ...

दल-बदल सिर्फ कानून का मामला नहीं, बल्कि जनादेश, राजनीतिक विचारधारा और जनता के भरोसे का सवाल है। जानिए कैसे सत्ता के लिए पाला बदलने...

48 घंटे का अल्टीमेटम: ज्ञानेश कुमार पर क्यों भड़का चुना...

ECI विवाद में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की 48 घंटे की मांग, SIR से हटे करोड़ों नाम और आयोग के भीतर दर्ज 14 आपत्तियों पर जानिए पूरा ...

FIR हुई तो क्या पुलिस को खुली छूट मिल गई? पत्रकार की तल...

पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ FIR और उनकी तलाश में दिल्ली पहुंची UP Police की कथित आधी रात की कार्रवाई ने पुलिस अधिकार, नागरिको...

जनता मालिक या सरकारी लाभार्थी? गांव के लोकतंत्र को किसन...

ग्रामीण लोकतंत्र पर केंद्रीकरण, राजनीति और नौकरशाही के बढ़ते प्रभाव की पड़ताल। क्या जनता को वोट मिला, लेकिन निर्णय लेने का अधिकार ...

“सत्ता का आदेश, IAS की कलम, पुलिस की FIR: इस असामाजिक ग...

भारत में IAS, पुलिस और सत्ता के बढ़ते गठजोड़ पर तीखा सवाल—क्या जनता की आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक शक्ति, FIR और मुकदमों का इस्तेम...

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