Tag: लोकतंत्र का संकट

“सत्ता का आदेश, IAS की कलम, पुलिस की FIR: इस असामाजिक ग...

भारत में IAS, पुलिस और सत्ता के बढ़ते गठजोड़ पर तीखा सवाल—क्या जनता की आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक शक्ति, FIR और मुकदमों का इस्तेम...

“जब प्रधानमंत्री ही जनता को बांटने लगें: ‘दिमागी नक्सल’...

प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ वाले बयान पर सवाल: क्या सत्ता को जनता की आलोचना से असहज होना चाहिए? लोकतंत्र में सव...

“‘जियो और जीने दो’ बनाम ‘मारो और जियो’: क्या भारतीय राज...

भारतीय राजनीति में बदलती राजनीतिक संस्कृति, विपक्ष के प्रति रवैया, असहमति की आज़ादी, सत्ता के केंद्रीकरण और लोकतांत्रिक जवाबदेही प...

‘जय-जय मोदी, हर-हर मोदी’: जब नेता भगवान बन जाए, समझिए ल...

दिल्ली प्रेस क्लब में ‘मोदी चालीसा’ और प्रधानमंत्री के कटआउट की आरती ने व्यक्तिपूजा, सत्ता की भक्ति और लोकतंत्र की दिशा पर गंभीर स...

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