BRICS बैठक में ईरान का UAE पर बड़ा आरोप, पश्चिम एशिया तनाव पर नई दिल्ली में बढ़ी कूटनीतिक गर्मी

नई दिल्ली में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने संयुक्त अरब अमीरात पर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया। इस बयान के बाद बैठक में पश्चिम एशिया संकट प्रमुख मुद्दा बन गया। भारत ने संतुलित रुख अपनाते हुए संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर दिया। विवाद ने BRICS के भीतर उभरते भू-राजनीतिक मतभेदों को भी उजागर किया।

BRICS बैठक में ईरान का UAE पर बड़ा आरोप, पश्चिम एशिया तनाव पर नई दिल्ली में बढ़ी कूटनीतिक गर्मी

BRICS बैठक में ईरान का UAE पर बड़ा आरोप, पश्चिम एशिया तनाव पर नई दिल्ली में बढ़ी कूटनीतिक गर्मी

नई दिल्ली, 14 मई 2026

नई दिल्ली में जारी BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान पश्चिम एशिया का बढ़ता तनाव चर्चा के केंद्र में रहा। बैठक में उस समय कूटनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया जब ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने संयुक्त अरब अमीरात पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ क्षेत्रीय देशों ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई है।

ईरानी विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता को बढ़ाने वाली नीतियाँ पूरे क्षेत्र के लिए खतरा बन रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “क्षेत्रीय सुरक्षा बाहरी सैन्य गठबंधनों से नहीं बल्कि पड़ोसी देशों के बीच विश्वास और सहयोग से सुनिश्चित हो सकती है।” हालांकि उन्होंने अपने वक्तव्य में सीधे किसी सैन्य कार्रवाई का विस्तृत उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनके बयान को संयुक्त अरब अमीरात की ओर संकेत माना गया।

बैठक में मौजूद कई राजनयिक सूत्रों के अनुसार, ईरान ने यह चिंता भी जताई कि कुछ देशों की नीतियों के कारण BRICS मंच पश्चिम एशिया संकट पर एक संयुक्त और संतुलित बयान तैयार करने में कठिनाई महसूस कर रहा है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का मानना है कि क्षेत्रीय संघर्षों पर निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है ताकि संगठन की सामूहिक विश्वसनीयता बनी रहे।

BRICS समूह में अब ईरान और संयुक्त अरब अमीरात दोनों सदस्य हैं। ऐसे में यह विवाद संगठन के भीतर उभरते राजनीतिक मतभेदों को भी उजागर करता है। बीते वर्षों में BRICS को पश्चिमी प्रभाव के विकल्प के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन सदस्य देशों के अलग-अलग रणनीतिक हित कई बार साझा नीति निर्माण को जटिल बना देते हैं।

भारत, जो इस वर्ष BRICS बैठकों की मेजबानी कर रहा है, ने पूरे विवाद पर संतुलित रुख बनाए रखा। भारतीय अधिकारियों ने क्षेत्रीय स्थिरता, संवाद और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया। बैठक से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत का प्रयास है कि संगठन आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय संवाद के अपने मूल एजेंडे से भटके नहीं।

बैठक के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक सहयोग, वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था और वैश्विक दक्षिण की भूमिका जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। लेकिन पश्चिम एशिया संकट और उससे जुड़ी राजनीतिक बयानबाज़ी ने बाकी मुद्दों पर भी प्रभाव डाला। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो उसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर भी दिखाई दे सकता है।

संयुक्त अरब अमीरात की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सावधानीपूर्ण रही। UAE से जुड़े अधिकारियों ने पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका देश क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग का समर्थन करता है। उनका कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव को बातचीत और संतुलित कूटनीति के माध्यम से कम किया जाना चाहिए।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS मंच अब केवल आर्थिक सहयोग का संगठन नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। इसी कारण सदस्य देशों के बीच मौजूद क्षेत्रीय विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं।

नई दिल्ली में जारी यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया पहले से ही कई सुरक्षा चुनौतियों और कूटनीतिक तनावों का सामना कर रहा है। ऐसे में BRICS देशों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं माना जा रहा। फिर भी भारत सहित कई सदस्य देश इस बात पर जोर दे रहे हैं कि संवाद और बहुपक्षीय सहयोग ही किसी भी क्षेत्रीय संकट का सबसे प्रभावी समाधान हो सकता है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow