भारत का कृषि मॉडल और किसान का भविष्य: क्या किसान केवल उत्पादन मशीन बनकर रह गया है?
भारत की कृषि व्यवस्था पिछले डेढ़ दशक में धीरे-धीरे कॉर्पोरेट नियंत्रित वैल्यू चेन में बदलती गई है, जहाँ बीज, उर्वरक, कीटनाशक, लॉजिस्टिक्स, प्रोसेसिंग, बीमा और फाइनेंस जैसे लगभग हर क्षेत्र पर निजी कंपनियों का प्रभाव बढ़ चुका है। किसान खेती का वास्तविक जोखिम उठाता है, लेकिन अपनी फसल का मूल्य तय करने की शक्ति उसके पास नहीं है। बढ़ती लागत, अस्थिर बाजार और कर्ज आधारित कृषि मॉडल ने किसान को आर्थिक रूप से कमजोर बनाया है। सरकार MSP, सब्सिडी और योजनाओं की बात करती है, लेकिन किसानों की बाजार शक्ति और आय सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। लेख में यह तर्क रखा गया है कि यदि किसान केवल उत्पादन करने वाला श्रमिक बनकर रह गया, तो भविष्य में कृषि पूरी तरह कॉर्पोरेट नियंत्रण में जा सकती है। समाधान के रूप में सहकारी मॉडल, किसान साझेदारी, FPOs, स्थानीय प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन में किसानों की भागीदारी को जरूरी बताया गया है, ताकि किसान केवल उत्पादक नहीं बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था का वास्तविक भागीदार बन सके।
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