Tag: Democracy

जब जनता राजनीतिक दलों से आगे निकलने लगे: लोकतंत्र के लि...

क्या भारत में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का स्वरूप बदल रहा है? यह गहन विश्लेषण बताता है कि युवाओं, जनआंदोलनों, संसद, सरकार और विपक्ष...

लोकतंत्र का नया 'आर्किटेक्चर': जन-प्रतिनिधित्व का विस्त...

लोकसभा सीटों के संभावित विस्तार और परिसीमन की बहस के बीच यह विश्लेषण लोकतंत्र, जन-प्रतिनिधित्व, संघवाद, विपक्ष की भूमिका और संसदीय...

मेरिट बारिश में भीग रही है, सत्ता अब भी सूखी है: जेपीएस...

झारखंड में जेपीएससी विवाद, सीआईडी की छापेमारी और बारिश के बीच जारी छात्र आंदोलन ने भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता, मेरिट और समान अवस...

बैंकीपुर उपचुनाव का संदेश: क्या भारतीय राजनीति अब जाति,...

बैंकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। क्या मतदाता अब ...

भागलपुर से 'यंग इंडिया' तक : गांधी की नैतिक चेतावनी और ...

महात्मा गांधी की भागलपुर यात्राओं से लेकर यंग इंडिया में प्रकाशित 'सात सामाजिक पाप' तक की ऐतिहासिक और वैचारिक यात्रा का विश्लेषण। ...

NEET से ध्यान भटकाने की राजनीति? 'मैंने माफ़ कर दिया' व...

NEET आंदोलन, जंतर-मंतर विवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'माफ़ी' वाले वीडियो के बाद उठे लोकतांत्रिक सवालों का गहन विश्लेषण। क्...

एथेनॉल पर गडकरी का विरोधाभास: पहले आलोचकों पर मुकदमे, अ...

क्या एथेनॉल विवाद में नितिन गडकरी के सार्वजनिक बयान, अदालत में दिए गए दावे और संसद में की गई स्वीकारोक्ति एक-दूसरे से मेल खाते हैं...

क्या सरकार का काम शासन चलाना है या लोगों की पार्टी पर न...

CJP के कथित पार्टी वीडियो पर उठे विवाद के बहाने यह लेख लोकतंत्र, निजता और राजनीतिक जवाबदेही के बीच संतुलन की पड़ताल करता है। क्या ...

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: "जिम्मेदारी तय किए बिना ...

सुप्रीम कोर्ट ने CJP मार्च हिंसा मामले में कहा कि जिम्मेदारी तय किए बिना जांच का कोई अर्थ नहीं है। जानिए अदालत की प्रमुख टिप्पणिया...

पुलिस की वर्दी संविधान की है या सत्ता की?...

दिल्ली के जंतर-मंतर और किसान घाट की घटनाओं की पृष्ठभूमि में यह संपादकीय पुलिस, संविधान और लोकतंत्र के संबंधों पर सवाल उठाता है। ले...

जब खाकी के भीतर से उठी संवेदनशीलता की आवाज़: आईजी सीमा ...

जंतर-मंतर घटनाक्रम के बाद आईजी सीमा धुंडिया के हस्तक्षेप और 26 सुधारात्मक कदमों ने भारतीय पुलिसिंग, लोकतांत्रिक अधिकारों और संवेदन...

सत्ता का अहंकार, खाकी की क्रूरता और एक स्त्री का हस्तक्...

जंतर मंतर, छात्र आंदोलन, लोकतंत्र, धर्मेंद्र प्रधान, सीमा धुंडिया, पुलिस सुधार, नागरिक पत्रकारिता, मानवाधिकार, राजनीतिक विश्लेषण, ...

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