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Opinion
Opinion
जनता मालिक या सरकारी लाभार्थी? गांव के लोकतंत्र को किसन...
ग्रामीण लोकतंत्र पर केंद्रीकरण, राजनीति और नौकरशाही के बढ़ते प्रभाव की पड़ताल। क्या जनता को वोट मिला, लेकिन निर्णय लेने का अधिकार ...
BRICS की नई दिल्ली घोषणा: बदलने जा रही है विश्व व्यवस्थ...
नई दिल्ली BRICS Summit 2026 की 140-बिंदु वाली संयुक्त घोषणा ने वैश्विक व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। स्थानीय मुद्रा मे...
BRICS ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को ललकारा: IMF-World ...
BRICS ने IMF और World Bank में सुधार, विकासशील देशों की भागीदारी, सस्ती विकास वित्त व्यवस्था, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और Glob...
भारत Mexico बनेगा या China? Sridhar Vembu बनाम Raghuram...
क्या भारत Mexico जैसे assembly मॉडल की ओर बढ़ रहा है या China जैसे technology-driven विकास की ओर? Sridhar Vembu और Raghuram Rajan ...
एफिल टॉवर पर नारी का अपमान? हिन्दू धर्म को बदनाम करने स...
एफिल टॉवर महिला कर्मचारियों विवाद के बहाने जानिए हिन्दू धर्म में स्त्री के सम्मान, समानता और शक्ति की परंपरा तथा भारत की महान स्त्...
‘गर्लफ्रेंड 0% Interest’! चेन्नई मेट्रो का ये विज्ञापन ...
चेन्नई मेट्रो के ‘Girlfriend–FD Interest’ विज्ञापन ने महिला सम्मान, प्रेम की स्वतंत्रता और विज्ञापन की सामाजिक जिम्मेदारी पर गंभीर...
“जब प्रधानमंत्री ही जनता को बांटने लगें: ‘दिमागी नक्सल’...
प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ वाले बयान पर सवाल: क्या सत्ता को जनता की आलोचना से असहज होना चाहिए? लोकतंत्र में सव...
GDP की चमक के पीछे आम आदमी की हकीकत: अर्थव्यवस्था, राजन...
भारत की 7.8% GDP वृद्धि, आम जनता की आर्थिक स्थिति, राजनीतिक फंडिंग, BJP की संपत्ति और Form 7 के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाने के आ...
“कागज पर 7.8% या 2.6% विकास, जमीन पर बेरोजगारी-कर्ज-महं...
भारत की 7.8% GDP growth पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। Base year और methodology बदलने से क्या आर्थिक हकीकत बदल जाती है? बेरोजगारी, महंग...
“बेटे की हत्या या Mental Health System की नाकामी? दिल्ल...
दिल्ली में सिजोफ्रेनिया से जूझ रहे 38 वर्षीय बेटे की हत्या ने भारत की मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह लेख...
सरकारी कंपनियां बिना स्थायी मुखिया: लापरवाही या निजीकरण...
CPSEs में नियमित CMD पदों की कमी और 70% Independent Director vacancies ने सरकारी कंपनियों की governance पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं...
“नशे में डूबता युवा, मोबाइल में कैद पीढ़ी और भ्रष्टाचार...
शिक्षा और आर्थिक असमानता, बेरोजगारी, नशे, मोबाइल की बढ़ती लत और भ्रष्टाचार के बीच फंसती युवा पीढ़ी पर तीखा विचार लेख। सवाल है—जब व...