“दिल्ली में जुटे 150+ किसान संगठन, 7 मुद्दों पर बनी एकजुटता; 25 नवंबर को कुरुक्षेत्र से होगा बड़े संघर्ष का ऐलान”
देश बचाओ मोर्चा के राष्ट्रीय सम्मेलन में 150 से अधिक किसान संगठनों ने MSP की कानूनी गारंटी, किसान कर्जमाफी, जल संरक्षण, समान शिक्षा-स्वास्थ्य, भूमि अधिग्रहण सुधार, छोटी जोत के किसानों की आय सुरक्षा और रोजगार के मुद्दों पर सात सूत्रीय संघर्ष की सहमति बनाई।
देश बचाओ मोर्चा
By- Ch. Sudhir Talyan
150 से अधिक किसान संगठनों के नेताओं का राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में संपन्न
सात सूत्रीय संघर्ष पर बनी सर्वसम्मति, राज्यों में किसान महापंचायतों के बाद 25 नवंबर को कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय महापंचायत
नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026। अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर देश में किसान राजनीति एक बार फिर सक्रिय होती दिखाई दे रही है। इसी क्रम में नई दिल्ली स्थित गुरुद्वारा रकाबगंज सभागार में 150 से अधिक किसान संगठनों के नेताओं की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में देशभर से आए किसान नेताओं ने किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आम जनता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
बैठक में देश बचाओ मोर्चा की संयोजक समिति के सदस्य श्री गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने संघर्ष के सात सूत्रीय प्रस्ताव को प्रस्तुत किया। प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा के बाद सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने सात प्रमुख मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने की सहमति व्यक्त की।
ट्रेड डील का पूरी तरह विरोध
बैठक में निर्णय लिया गया कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील में केवल संशोधन की मांग करने के बजाय, किसान संगठन इस डील का पूरी तरह विरोध और बहिष्कार करेंगे। किसान नेताओं का कहना था कि किसी भी व्यापार समझौते में किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हित सर्वोच्च प्राथमिकता होने चाहिए तथा ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता जो भारतीय कृषि और किसानों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डाले।
MSP की कानूनी गारंटी के लिए संघर्ष
किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी के संघर्ष को जारी रखने पर भी सर्वसम्मति बनी। किसान नेताओं ने कहा कि कृषि क्षेत्र को बाजार की अनिश्चितताओं के हवाले नहीं छोड़ा जा सकता और किसानों को उनकी उपज का सुनिश्चित एवं सम्मानजनक मूल्य मिलना आवश्यक है।
किसानों की कर्जमाफी की मांग
बैठक में किसानों के बढ़ते कर्ज को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया। किसान नेताओं ने कहा कि जब बड़े उद्योगपतियों और कॉरपोरेट क्षेत्र के बड़े कर्जों के पुनर्गठन और राहत के रास्ते निकाले जा सकते हैं, तो किसानों के कर्ज के मामले में भी समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
किसानों के पूर्ण कर्जमुक्ति के लिए संघर्ष को सात सूत्रीय कार्यक्रम का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया गया।
जल संकट और वर्षा जल संरक्षण
भूजल स्तर लगातार नीचे जाने को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए बैठक में वर्षा के पानी के अधिकतम उपयोग तथा जल संरक्षण को लेकर देशव्यापी अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
किसान संगठनों का मानना है कि वर्षा जल को संरक्षित कर सिंचाई और भूजल पुनर्भरण की व्यवस्था मजबूत किए बिना कृषि का भविष्य सुरक्षित नहीं किया जा सकता। इसलिए जल प्रबंधन को किसान आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया गया है।
समान और निःशुल्क शिक्षा तथा स्वास्थ्य
बैठक में शिक्षा और स्वास्थ्य को भी संघर्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि शिक्षा और स्वास्थ्य प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इसकी जिम्मेदारी राज्य की है।
देश में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें आर्थिक स्थिति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर नागरिकों के बीच शिक्षा और स्वास्थ्य की गुणवत्ता में भेदभाव न हो। सभी नागरिकों को समान तथा निःशुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को आंदोलन का हिस्सा बनाने पर सहमति बनी।
भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव और किसान की भागीदारी
भूमि अधिग्रहण के सवाल पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। तय किया गया कि इस मुद्दे पर किसान संगठन संघर्ष करेंगे। हालांकि, अलग-अलग राज्यों की परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश समितियों को अपने-अपने राज्यों के कानून, परिस्थितियों और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार संघर्ष की रणनीति तय करने की स्वतंत्रता दी गई।
बैठक में सुधीर तल्यान ने भूमि अधिग्रहण व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुझाव रखते हुए कहा कि मौजूदा भूमि अधिग्रहण कानून में आवश्यक संशोधन कर उसे “पब्लिक-प्राइवेट-फार्मर पार्टनरशिप” (Public-Private-Farmer Partnership) की तर्ज पर लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं में किसान को केवल जमीन देने वाला पक्ष मानने के बजाय उसे परियोजना में भागीदार बनाया जाना चाहिए। किसान की जमीन का अधिग्रहण या उपयोग होने पर उसे केवल एकमुश्त मुआवजा देकर उसकी भूमिका समाप्त नहीं होनी चाहिए, बल्कि परियोजना से होने वाले आर्थिक लाभ में भी उसकी हिस्सेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
सुधीर तल्यान ने यह भी सुझाव दिया कि छोटी जोत के किसानों को आय संरक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि सीमित भूमि पर खेती करने वाले किसानों की आय बाजार, मौसम और उत्पादन लागत के उतार-चढ़ाव से असुरक्षित न रहे। उन्होंने कहा कि छोटे किसान को केवल उत्पादन करने के लिए नहीं, बल्कि सम्मानजनक और स्थिर आय के लिए भी नीतिगत सुरक्षा मिलनी चाहिए।
बेरोजगारी के खिलाफ राष्ट्रीय संघर्ष
बेरोजगारी को भी देश बचाओ मोर्चा के संघर्ष का प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि सरकार या तो सभी इच्छुक नागरिकों को रोजगार उपलब्ध कराए, अथवा सरकारी नौकरी चाहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को देश की औसत आय की आधी राशि प्रतिमाह प्रदान करने की व्यवस्था करे।
बैठक में कहा गया कि बेरोजगारी की समस्या केवल व्यक्तिगत आय का संकट नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था, युवाओं के भविष्य और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा प्रश्न है। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया कि इस प्रकार की सिफारिश वर्ष 2011 में संसद की दीपक गोयल समिति द्वारा की जा चुकी है।
स्थायी समिति का गठन फिलहाल स्थगित
बैठक में देश बचाओ मोर्चा की पहल करने वाले लोगों की वर्तमान संयोजक समिति को भंग कर स्थायी समिति बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि स्थायी समिति के गठन की प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित रखा जाएगा।
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पहले देश के विभिन्न राज्यों में किसान महापंचायतों का आयोजन किया जाएगा। इन महापंचायतों के माध्यम से किसानों और किसान संगठनों के बीच व्यापक संवाद स्थापित किया जाएगा तथा इसके बाद देश बचाओ मोर्चा की स्थायी समिति के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
25 नवंबर को कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय महापंचायत
बैठक में निर्णय लिया गया कि देश के सभी राज्यों में किसान महापंचायतों का आयोजन किया जाएगा। इन महापंचायतों के बाद 25 नवंबर 2026 को सर छोटूराम के जन्मदिवस के अवसर पर कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की अंतिम महापंचायत आयोजित की जाएगी।
यदि विभिन्न राज्यों में किसान महापंचायतों का सिलसिला नवंबर माह में भी जारी रहता है, तो राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम को 25 नवंबर के बाद भी आगे बढ़ाया जा सकता है।
इसी राष्ट्रीय महापंचायत में किसान संगठनों की ओर से आगामी संघर्ष की विस्तृत रणनीति और कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी।
किसान नेताओं ने रखे विचार
रणनीतिक बैठक में संयोजक समिति के सदस्यों गुरनाम सिंह चढ़ूनी, सरदार वी. एम. सिंह, प्रकाश पोहरे, शिवकुमार कक्का और सुरजीत सिंह फूल ने आगामी कार्यक्रमों तथा किसान संघर्ष की रणनीति को लेकर अपने विचार एवं वक्तव्य प्रस्तुत किए।
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बैठक में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कृषि, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, जल, भूमि और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को व्यापक जनसंघर्ष के साथ जोड़ने पर जोर दिया।
राष्ट्रीय रणनीतिक बैठक सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चली। बैठक में देशभर से आए किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने आगामी आंदोलन को व्यापक और राष्ट्रीय स्वरूप देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भवदीय,
गुरनाम सिंह चढ़ूनी
सदस्य – केंद्रीय संयोजक समिति
देश बचाओ मोर्चा
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